Wow! Signal: क्या सच में एलियंस ने हमसे संपर्क किया था? जानिए क्या है इसके पीछे का रहस्य

इस अनंत असीमित ब्रह्मांड में ऐसे कई राज दफन हैं, जिनके ऊपर से अब तक पर्दा नहीं उठ पाया है। हमारी वैज्ञानिक उन्नति ने भले ही कई अनजाने पहलुओं को जाना है, पर आज भी मूलभूत सवाल ज्यों के त्यों बने हुए हैं। उन्हीं में एक सवाल है कि क्या पृथ्वी के अलावा भी किसी दूसरे ग्रह पर जीवन पनप रहा होगा? या कोई एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल एडवांस लाइफ ब्रह्मांड में किसी ग्रह पर मौजूद होगी? इन सवालों के उत्तर की खोज में वैज्ञानिक लंबे समय से लगे हुए हैं, पर आज तक इनका जवाब नहीं मिला है। हालांकि ऐसे कई घटनाक्रम इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं, जिन्होंने उस दौरान एलियंस लाइफ को लेकर खूब सुर्खियां बटोरी थी। उन्हीं में से एक है वाओ सिग्नल। कहा जाता है कि वाओ सिग्नल के माध्यम से एलियंस ने पृथ्वी वासियों के साथ संपर्क करने की कोशिश की थी। इसी कड़ी में आज हम जानेंगे रहस्यमय वाओ सिग्नल के बारे में।

15 अगस्त 1977 को ओहाइओ (Ohio) राज्य में स्थित एक विश्वविद्यालय के बिग इयर टेलीस्कोप ने एक अज्ञात सिग्नल को कैच किया। ये रहस्यमय सिग्नल करीब 200 प्रकाश वर्ष दूर से आया था। जब इस सिग्नल को जेरी एहमन ने डिकोड किया, तो उन्हें काफी हैरानी हुई। सिग्नल को डिकोड करने के बाद उन्होंने एक खास कूट चिह्न 6EQUJ5 पर लाल रंग से घेरा बनाकर उसके पास Wow! लिख दिया।

इस सिग्नल की व्याख्या के बाद कई खगोलविदों ने ये संभावना जताई कि हो सकता है कि इसे किसी एडवांस एलियन लाइफ ने हमसे संपर्क करने के लिए भेजा हो। उस दौरान सिग्नल को डीकोड करने पर वैज्ञानिकों को ऐसी कई बातें पता चली जो इस बात की ओर इशारा कर रही थीं कि इसे एक एडवांस एलियन लाइफ ने हम तक भेजा था। इस घटना को हुए आज 40 से भी ज्यादा साल बीत गए हैं।

हालांकि उसके बाद से अब तक कोई भी ऐसा सिग्नल वैज्ञानिकों को प्राप्त नहीं हुआ है, जो एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल लाइफ की मौजूदगी का साबूत देता हो। इसी वजह से वाओ सिग्नल को लेकर कई लोग इस बात की प्रबल दावेदारी करते हैं कि इसे एलियंस ने हम तक भेजा था।

वाओ सिग्नल को लेकर हाल ही में एंटोनियो पेरिस की टीम का एक रिसर्च पेपर वाशिंगटन एकेडमी ऑफ साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ। उस पेपर में इस बात का उल्लेख किया गया था कि वाओ सिग्नल किसी एलियंस से नहीं बल्कि यह एक धूमकेतु से हमारे पास आया था। जर्नल में इस बात को भी बताया गया था कि वाओ संकेत की फ्रिक्वेंसी 1420 MHz थी, जो कि हाइड्रोजन गैसों के उत्सर्जन आवृत्ति के बराबर है। धूमकेतु पर स्थित हाइड्रोजन के बादल इसी तरह के संकेत ट्रांसमिट करते हैं।

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